बिहार में धरती कांपी: पटना, नालंदा समेत 6 जिलों में 3.5 तीव्रता के भूकंप से हल्के झटके, जानमाल का नुकसान नहीं

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पटना4 घंटे पहले

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पटना के कई इलाकों में लोग देर रात तक घरों से बाहर ही खड़े रहे। सभी अपने परिजन की खैरियत जानने की कोशिश कर रहे थे।

बिहार की राजधानी पटना में सोमवार रात 9 बजकर 27 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। कुछ सेकंड तक कंपन महसूस हुआ। दहशत में लोग घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात ये है कि भूकंप से अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। नेशनल सेंटर पर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र नालंदा से 20 किमी दूर था।

पटना के बोरिंग रोड, आशियाना नगर, पटेल नगर में लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। वहीं, नालंदा, गया, नवादा, शेखपुरा, औरंगाबाद और सासाराम जिलों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

नेशनल सेंटर पर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र नालंदा से 20 किमी दूर था।

नेशनल सेंटर पर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र नालंदा से 20 किमी दूर था।

पटना में देर रात तक घरों से बाहर रहे लोग
जिस समय भूकंप के झटके महसूस हुए, उस वक्त लोग डिनर की तैयारी में थे। झटका महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकले और फोन पर परिजन की खैरियत पूछते रहे। पटना के बोरिंग रोड, आशियाना नगर, पटेल नगर में लोग देर रात तक भी घरों से बाहर खड़े रहे।

भूकंप से घरों में बर्तन गिर गए
बोरिंग रोड में रहनेवाली नेहा ने बताया कि वह रसोई में खाना बना रही थी, तभी बर्तन गिरने की आवाज आने लगी। पाटलिपुत्र कॉलोनी में रहने वाली निवेदिता राज ने बताया कि वह भी किचन में खाना बना रही थी, तभी अचानक कंपन महसूस हुआ। शिवपुरी के शैलेंद्र सिंह और सुमन कुमार ने बताया कि वे फर्श पर बैठकर खाना खा रहे थे, तभी रात को 9 बजकर 23 मिनट पर कम्पन महसूस हुआ।

2015 में नेपाल में जोरदार भूकंप आया था
पटना में सोमवार को आए भूकंप ने लोगों को 25 अप्रैल 2015 की याद दिला दी। तब नेपाल में 5.3 तीव्रता के भूकंप में 8000 से ज्यादा मौतें और 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके चलते बिहार में भी कई झटके महसूस किए गए थे। नेपाल से सटे सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा समेत उत्तरी बिहार में तो लोग कई दिनों तक आशंकित रहे थे।

ऐसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके केंद्र (एपीसेंटर) से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों से लगाया जाता है। सैकड़ों किलोमीटर तक फैली इस लहर से कंपन होता है। धरती में दरारें तक पड़ जाती हैं। भूकंप का केंद्र कम गहराई पर हो तो इससे बाहर निकलने वाली ऊर्जा सतह के काफी करीब होती है, जिससे बड़ी तबाही होती है।

भूकंप के जोन 5 में आता है बिहार
​​​​​​​भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर जोन-2, 3, 4 और 5 में बांटा गया है। जोन-2 सबसे कम खतरे वाला और जोन-5 सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन माना जाता है। दक्षिण भारत के ज्यादातर हिस्से सीमित खतरे वाले जोन-2 में आते हैं। मध्य भारत भी कम खतरे वाले जोन-3 में आता है। वहीं, जोन-4 में जम्मू और कश्मीर का कुछ हिस्सा, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, उत्तर बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र शामिल हैं। जोन-5 में जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी और मध्य हिमालय, उत्तर और मध्य बिहार, उत्तर-पूर्व भारत, कच्छ का रण और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह आते हैं।



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