डिफेंस डील पर चेतावनी: रिपोर्ट में दावा- रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदना भारत के लिए सही नहीं, US पाबंदी लगा सकता है

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वॉशिंगटन2 घंटे पहले

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भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पहली यूनिट 2020 में मिलनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। यह सौदा करीब 39 हजार करोड़ रुपये का है। -फाइल फोटो

रूस से 38 हजार 933 करोड़ रुपए का एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का सौदा भारत के लिए मुसीबत बन सकता है। ऐसा करने पर अमेरिका भारत पर सख्त प्रतिबंध लगा सकता है। US कांग्रेस की एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बेहतर संबंध होने के बावजूद पिछले महीने तुर्की के साथ ऐसा कर चुका है।

कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) अमेरिकी कांग्रेस की इंडिपेंडेंट रिसर्च विंग है। इसमें हाल में जारी रिपोर्ट में कहा है कि भारत दूसरे देशों के साथ ज्यादा से ज्यादा तकनीक शेयर करने और मिलकर प्रोडक्शन करने पर जोर दे रहा है। वहीं, अमेरिका भारत की डिफेंस पॉलिसी में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की सीमा बढ़ाने जैसे सुधार चाहता है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एस -400 के सौदे की वजह से भारत पर फिर अमेरिकी प्रतिबंधों की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, CRS की यह रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस का ऑफिशियल व्यू नहीं है। सरकार को कोई फैसला लेने में मदद के इरादे से इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट इसे तैयार करते हैं।

2018 में हुई थी डील

अक्टूबर, 2018 में भारत ने रूस के साथ एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने के लिए सौदा किया था। यह सौदा करीब 5.43 अरब डॉलर (38 हजार 933 करोड़ रुपए) का है। 2019 में भारत ने रूस को सौदे की पहली किश्त लगभग 800 मिलियन डॉलर का भुगतान कर दिया था।

भारत को पहले मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सप्लाई 2020 में होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सभी यूनिट की डिलिवरी 2025 तक होना है। इस सौदे पर ट्रम्प प्रशासन ने कहा था कि भारत का यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों को बुलावा दे सकता है।

दुनिया का सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम

एस -400 को जमीन से हवा में मार करने वाला दुनिया का सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम माना जाता है। पिछले महीने ही रूस ने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद एस -400 मिसाइल सिस्टम के एक बैच की सप्लाई सहित भारत के साथ दूसरे रक्षा सौदों पर दोनों देश बेहतर तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने यह सिस्टम खरीदने पर तुर्की पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने की आलोचना भी की थी। उन्होंने कहा था कि रूस ऐसी एकतरफा कार्रवाई को मंजूरी नहीं दे सकता। तुर्की के साथ रूस ने 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सौदा किया है। नाटो का मेंबर होने के बावजूद तुर्की ने रूस से यह सौदा किया था। इस फैसले ने अमेरिका को नाराज कर दिया था।

भारत के लिए जरूरी है यह सिस्टम

एस-400 मिसाइल सिस्टम, एस-300 का अपडेटेड वर्जन है। यह 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी खत्म कर सकता है। एस-400 डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। यह सिस्टम एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है।

एस-400 से अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिराया जा सकता है। वहीं, यह परमाणु क्षमता वाली 36 मिसाइलों को एक साथ खत्म कर सकता है। भारत के अलावा तुर्की, चीन, कतर और सऊदी अरब भी यह सिस्टम खरीद रहे हैं।



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