कोरोना से सबक: इन 3 तरीकों से भविष्य में होने वाली महामारियों को रोक जा सकता है, जानें दुनिया के 22 वैज्ञानिकों की राय

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28 मिनट पहले

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कोरोना ने पूरी दुनिया में दहशत फैला रखी है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर बात कर रहे हैं कि भविष्य में कोरोना जैसी महामारी को रोकने के लिए किस तरह के उपाय किए जा सकते हैं? एक इंटरनेशनल ग्रुप के 22 वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम पर्यावरण के सुरक्षा लिए कुछ जरूरी कदम उठाएं और नेचुरल डिफेंस को रिस्टोर कर सकें, तो हम ऐसी महामारियों से बच सकते हैं।

अभी 17 लाख वायरस जानवरों और पक्षियों में छुपे हैं

IPEB (इंटर-गवर्नमेंटल साइंस पॉलिसी प्लेटफॉर्म ऑन बायोडायवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विस ) के पैनल का हिस्सा रहे डॉ. पीटर डेसजेक का कहना है कि कोरोना या दूसरी महामारी के फैलने के पीछे कोई बड़ा रहस्य नहीं है। 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू के बाद से कोरोना दुनिया की अबतक 6वीं सबसे बड़ी महामारी है। इसमें इंसान की गतिविधियों का अहम रोल रहा है।

अभी 17 लाख ऐसे वायरस हैं, जो स्तनधारी जानवर और पक्षियों में छुपे हुए हैं। हालांकि, ये सभी अब तक खोजे नहीं जा सके हैं। इनमें 8.27 लाख से ज्यादा वायरस इंसान को संक्रमित कर सकते हैं।

इंसान की गतिविधियों से जलवायु और जैव विविधता में काफी हद तक परिवर्तन आए हैं। इस तरह के प्राकृतिक बदलाव से कभी भी महामारी फैलने का खतरा बना रहता है। जमीन का अधिक उपयोग, देशों के बीच व्यापार, उत्पादन और उसकी खपत से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। अगली स्लाइड में जानें कैसे फैलता है वायरस, जो आगे जाकर महामारी का रूप ले लेता है?

इन 3 तरीकों से भविष्य में महामारी से बचा जा सकता है

1- प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण

  • वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और उनके अधिक इस्तेमाल पर लगाम लगाने पर ध्यान देने की जरूरत है।
  • डेसजेक कहते हैं कि वैज्ञानिकों की तरफ से दिए गए सबूत एक पॉजीटिव निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं। इंसान के पास महामारी को रोकने की क्षमता है, लेकिन वह उस क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।
  • जिस तरह इंसान की गतिविधियों की वजह से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव आए हैं, अगर वो इसे दुरुस्त करने की दिशा में सही कदम उठाए, तो सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। लेकिन अब इंसान की सोच और नजरिया पर्यावरण के बचाव को लेकर स्थिर हो चुका है। वह कुछ करना ही नहीं चाहता है।

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2- वर्ल्ड फोरम बनाएं

अनुमान है कि कोरोना को रोकने में दुनिया को 16 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिकों का पैनल इसे रोकने के लिए हाई लेवल इंटर गवर्नमेंटल काउंसिल बनाने की मांग कर रहा है, जो भविष्य में महामारी को रोकने के लिए काम कर सके।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं तो भविष्य में कोरोना से बड़ी महामारी फैल सकती है। ये महामारी इससे तेज फैलेगी और इससे ज्यादा लोगों की जान जा सकती है। कोरोना को रोकने में जिस तरह के बड़े खर्चे का अनुमान लगाया गया है, वह पर्यावरण की रक्षा में होने वाले खर्चे का 100 गुना है।

3- कार्बन उत्सर्जन कम करें

  • सभी वैज्ञानिक कुछ बदलावों की सलाह देते हुए कहते हैं कि इंसान को दूसरी चीजों की खपत, कृषि और ट्रेड को कम करने की जरूरत है। इसके अलावा मीट की खपत, पशुओं का उत्पादन और महामारी को बढ़ाने वाली सारी गतिविधियों पर ज्यादा से ज्यादा टैक्स लगाने की जरूरत है।
  • FAQ (द यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन) का अनुमान है कि 2030 तक दुनिया भर में मीट की खपत बढ़ सकती है। ये 45.3 KG प्रति व्यक्ति हो सकती है, जो 1960 की तुलना में दोगुना है।
  • कोरोना लॉकडाउन में पॉल्युशन कम हुआ और गरीबी बढ़ी है। ऐसे में आशंका है कि कहीं फिर से लोग जिंदा रहने के लिए जानवरों का अवैध शिकार और जंगल खत्म कर उसपर खेती करना शुरू न कर दें। इस तरह की सभी गतिविधि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में नुकसान पहुंचाती है।
  • द वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की एक रिपोर्ट ‘विजन टूवर्ड्स अ रिस्पांसिबल फ्यूचर ऑफ कंजप्शन’ की मानें तो सभी इंडस्ट्री को अपनी खपत में कमी लाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। पर्यावरण में होने वाले असर को कम करना और सर्कुलर इकोनॉमी को डेवलप करना होगा। जैसे- वेस्ट मटेरियल का ज्यादा से ज्यादा रीयूज कर सकते हैं।

महामारी को लेकर बिल गेट्स ने 5 साल पहले ही आशंका जाहिर की थी

  • साल 2015 में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने कहा था कि आने वाले सालों में करोड़ों लोगो की मौत की वजह कोई युद्ध नहीं, बल्कि एक महामारी होगी। उनकी इस बात को 5 साल बाद कोरोना महामारी ने सच साबित कर दिया।
  • ये बात उस समय कही थी, जब अफ्रीका के कई देशों में इबोला वायरस ने कहर बरपा रखा था। उस समय इबोला से 11 हजार लोगों की जान चली गई थी।



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