अव्यवस्था का नतीजा: 1799 हादसों में 316 जानें गईं, 15 स्थानों पर रोज ट्रैफिक जाम, फिर भी लाेड का सर्वे नहीं

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ग्वालियरकुछ ही क्षण पहले

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  • शहर के 300 लोगों ने लिया था सर्वे में हिस्सा, 52 प्रतिशत लोगों ने कहा था- वे खराब सड़क एवं ट्रैफिक से परेशान

सुगम ट्रैफिक…शहर की सबसे बड़ी जरूरत…लेकिन जब इसकी बदहाली लोगों की जान लेने लगे तो जरूरी हाे जाता है कि इसे दुरुस्त किया जाए। ग्वालियर के 15 इलाके खराब ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे हंै। पिछले एक साल (जनवरी से दिसंबर 2020) तक शहर में 1799 हादसों में 316 लोग जान गंवा चुके हैं।

दैनिक भास्कर केे 300 लोगों के सर्वे में 52 फीसदी ने खराब सड़क एवं ट्रैफिक को शहर की सबसे बड़ी समस्या बताया था। दैनिक भास्कर-पब्लिक एजेंडा 2021 के तहत 2 जनवरी को प्रकाशित इस सर्वे रिपोर्ट को आधार मानकर भास्कर टीम ने खराब ट्रैफिक की वजह तलाशीं ताे जाे हकीकत सामने आई, वह अफसराें की लापरवाही और ट्रैफिक के प्रति उदासीनता दर्शाती है।

जिन सरकारी महकमाें पर ट्रैफिक काे दुरुस्त रखने का जिम्मा है, उन्हें ये पता ही नहीं है कि किस रूट पर कितने ऑटाे-टेंपाे और ई-रिक्शा ज्यादा दाैड़ रहे हैं और वे सड़काें पर जाम लगा रहे हैं। वजह- पिछले 10 साल में जिम्मेदार विभागाें ने शहर की सड़काें, तिराहे और चाैराहाें पर बढ़े ट्रैफिक लाेड का सर्वे ही नहीं कराया। नतीजा- किस सड़क पर कितना ट्रैफिक दबाव है और किस रास्ते पर क्या सुधार की जरूरत है, कहां पार्किंग स्पॉट हाेना चाहिए और कैसे ट्रैफिक व्यवस्थित किया जा सकेगा, ये जानकारी नगर निगम, पुलिस और परिवहन विभाग काे नहीं है।

एक रास्ते पर तीन सिग्नल
शहर में करीब 50 स्थानाें पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं। कुछ रास्ताें पर कम दूरी पर ही तीन-तीन ट्रैफिक सिग्नल लगा दिए गए हैं। इनकी टाइमिंग में भी गफलत है, क्याेंकि इन्हें लगाने से पहले किसी तरह का तकनीकी सर्वे नहीं कराया गया।

यहां पर रोजाना ट्रैफिक जाम

  • झांसी रोड
  • गोला का मंदिर चौराहा
  • शिंदे की छावनी
  • माधव नगर चौराहा
  • जयेंद्रगंज
  • पाटनकर बाजार
  • कंपू
  • किलागेट
  • हजीरा
  • बहोड़ापुर
  • बारादरी
  • माधौगंज चौराहा
  • इंदरगंज
  • लक्ष्मीगंज
  • नाका चंद्रबदनी

सिटी ट्रांसपाेर्ट सिस्टम काे बेहतर करने की है जरूरत
^सिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम जब तक बेहतर नहीं होगा, शहर का ट्रैफिक बदहाल रहेगा। वजह जगह-जगह खड़े होने वाले ऑटो-टेंपो और बढ़ते निजी वाहन हैं। अगर आम लोगों को बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलेगा तो वह निजी वाहन का उपयोग कम करेंगे। एक्सपर्ट कमेटी या किसी निजी एजेंसी से सर्वे कराना चाहिए।
– एमपी सिंह, रिटायर्ड आरटीओ, ट्रैफिक विशेषज्ञ

सर्वे करने के लिए हमारे पास कोई विशेषज्ञ ही नहीं है
^शहर के ट्रैफिक को लेकर 10 साल पहले दिल्ली की एजेंसी से सर्वे कराया गया था। उन्होंने जो सुझाव दिए थे, उसमें से कुछ पर अमल हो गया था। इसके बाद सर्वे नहीं कराया गया। ट्रैफिक सेल में कोई ट्रैफिक इंजीनियरिंग का विशेषज्ञ भी नहीं है।
– प्रेम पचौरी, प्रभारी, ट्रैफिक सेल, नगर निगम

विस्तृत सर्वे की जरूरत है, तभी ट्रैफिक सुधार संभव हो सकेगा
^शहर के करीब 15 चौराहे ऐसे हैं, जहां ट्रैफिक सुधार व हादसे रोकने के लिए खुद सर्वे किया था। इसमें अधिकांश कार्य नगर निगम और स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के सहयोग से होने हैं। िवस्तृत सर्वे की जरूरत है, तभी ट्रैफिक सुधार संभव है। हालांकि हम अपने स्तर पर इसे करते रहते हैं।
– पंकज पांडे, एएसपी, ट्रैफिक

खराब ट्रैफिक की 3 वजह
शहर में 935 टेंपो, 8278 ऑटाे और 1800 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परिवहन विभाग ने शहर में 5500 काे चलाने का परमिट दिया है। शेष वाहन बिना परमिट के चलाए जा रहे हैं।

ये हाेना चाहिए: बिना परमिट चलाए जा रहे सवारी वाहनाें काे जब्त करने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए।
शहर में औसतन 60 हजार वाहन हर साल बढ़ रहे हैं, लेकिन पार्किंग स्पॉट पहले से तय 24 ही हैं। इनमें सिर्फ 3500 गाड़ियों को रखने की क्षमता है।

ये हाेना चाहिए: सर्वे कर ट्रैफिक वॉल्यूम के हिसाब से हर इलाके और सड़क पर पार्किंग स्पॉट निर्धारित किए जाने चाहिए।
ज्यादातर टेंपो तय रूट की बजाय दूसरे मार्गाें पर चलाए जा रहे हैं। ई-रिक्शा का कोई रूट ही निर्धारित नहीं किया गया है।

ये हाेना चाहिए: शहर में किस सड़क पर कितने सवारी वाहनों को अनुमति देनी है, इसके लिए लाेड सर्वे कर प्लान बनाना चाहिए।



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